Saturday, March 5, 2016

निर्मल सरित सा प्रवाह मेरा रहने दो

निर्मल सरित सा प्रवाह मेरा रहने दो
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जन्मी मै , रूपवान बेटी प्यारी सी
माँ-पिता ने पाला मुझे लाड-दुलार में
बचपन से प्रशंसा बनी प्रत्याशा मेरी
निर्मल सरित सा प्रवाह मेरा रहने दो

आया कैशोर्य बना रूप समस्या मेरा
माँ-पिता के लिए बनी सुरक्षा चुनौती
भाई बैचैन बेसिर-पैर पीछे की सुनकर
निर्मल सरित सा प्रवाह मेरा रहने दो

निर्दोष मै ना लाई मिला रूप माँग कर
ना शिकवा गर निहारें प्रशंसा दृष्टि से
नारी बीच रहते क्यों वासना से देखते
निर्मल सरित सा प्रवाह मेरा रहने दो

समय की माँग मै पढ़ लिखने निकली
सहपाठी ही प्रयास करते फुसलाने को
जैसे तैसे बची पिता भाई सतर्कता से
निर्मल सरित सा प्रवाह मेरा रहने दो

शिक्षा ले निकली धन अर्जन के लिए
नारी स्वावलंबन आवश्यक जानकार
सहकर्मी अजब दृष्टि शरीर पर डालते
निर्मल सरित सा प्रवाह मेरा रहने दो

संस्कृति अनुरूप हुई अब विवाहिता मै  
बन गई प्राण-प्रिया ,मै पति की अपने
घूरते संबंधी-पडोसी अपने ही हो तुम
निर्मल सरित सा प्रवाह मेरा रहने दो
--राजेश जैन
06-03-2016
https://www.facebook.com/narichetnasamman


 

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