Wednesday, February 28, 2018

मेरी आँखों को चश्मे की जरूरत है

मेरी आँखों को चश्मे की जरूरत है
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गर न देख सकूँ माँ के त्याग - बेटा होकर
मेरी आँखों को चश्मे की जरूरत है
गर न देख सकूँ बहन के त्याग - भाई होकर 
मेरी आँखों को चश्मे की जरूरत है
गर न देख सकूँ पत्नी के त्याग - पति होकर
मेरी आँखों को चश्मे की जरूरत है
गर न देख सकूँ बेटी के त्याग - पिता होकर
मेरी आँखों को चश्मे की जरूरत है
गर न देख सकूँ नारी का भयभीत जीवन यापन करना 
मेरी आँखों को चश्मे की जरूरत है
--राजेश चंद्रानी मदनलाल जैन
01-03-2018
औरों को सिर्फ़ अपने ग्लैमर से लुभाया - फिर विलीन हो गये
मानव जीवन मिला मगर - कर्तव्य मानव के निभाना भूल गये


कर्तव्य मानव जीवन का - सुखद मानव समाज निर्माण होता है
मानव जन्मे मगर - निभायें नहीं दायित्व देखना दुःखद होता है




Tuesday, February 27, 2018

ज़िंदगी अपने तरह बसर कर - हम चले जायेंगे
भले बनें सब खयाल ज़ेहन में - रख ले जायेंगे

मौका देगी ये ज़िंदगी हमें - जब तक
क्यों है ये ख़ून ख़राबा सोचेंगें - तब तक

ये ख़ून ख़राबा कब, क्यों और किसे - मजा देता है
सबमें हो भाईचारा हमें तो ये देखना - मजा देता है

पति हो साथ तब भी पत्नी - सुरक्षित क्यों नहीं
कितनी ही बड़ी हस्ती हो नारी - सुरक्षित क्यों नहीं



 

Monday, February 26, 2018

कभी पसंद रहे फिर नापसंद - का गणित बड़ा सरल लगता है
उसके हित में कोई अच्छाई नहीं बचती - तब वह हमें नापसंद कर देता है


किसी को नापसंद हम - हम में कोई हीनता की बात नहीं
उसकी दृष्टि में कमी - अपनी ही देखता हमारी अपेक्षायें वह देखता नहीं


आसमां से बरसें ओले, ठिठुरती ठंडी या शोलें - उपाय जमीं पर करने होंगे
आसमां पर बंधन नहीं - वह जीवन प्रकाश औ जल भी दिया करता है


जिंदगी या नाम - भले छोटे हों , पर काम बड़े होने चाहिए
इंसान जन्में हैं हम तो - काम इंसानियत के होने चाहिये

इतना गहन दर्द - बयां क्यों करते हैं
ख़ून बहना नापसंद हमें - चाहे लफ़्ज़ों से ही बहता हो

वफ़ा की दलील - ज़िंदगी है मौत नहीं
मोहब्बत ज़िंदगी का लुफ़्त है - अलविदा नहीं 

मोहब्बत में "दर्द" की जिरह में - चाहे में हार जायें हम
मोहब्बत से मिले "खुशियाँ" - की जिरह करते रहेंगें हम

मोहब्बत में खुशियाँ चाहे - साथ या अलगाव में मिले
अलगाव भी हमें पसंद कि - अहम "मोहब्बत" होती है



 

Sunday, February 25, 2018

पुण्य का उदय - धन वैभव रूप भी मिलता है
श्रेयस्कर किंतु - आत्म-कल्याण रूप मिलना होता है

धन-वैभव में जब सुख नहीं यह ज्ञात हो जाता है
आत्म-कल्याण - तब हमारे संकल्प में आ जाता है

पुण्य कर्मों का 'धन-वैभव' रूप मिला फल , अधपका होता है
जबकि 'आत्म-कल्याण' रूप मिला फल , पका(मीठा) होता है



 
मोहब्बत , मोहब्बत होती वह कभी बदलती नहीं
जो बदल गए , उनका करना मोहब्बत होती नहीं

मोहब्बत , मोहब्बत होती वह कभी बदलती नहीं
जो बदल गए , उनका करना मोहब्बत होती नहीं

मौत के बाद - कोई जीवन हमारा नहीं होता , मगर
निभाया कर्तव्य , अभिव्यक्त विचार हमारा होता है  

Saturday, February 24, 2018

मिला के आँखे तुम से - धोखा हम खाते हैं
जादुई वज़ूद तुम्हारा कि - छल में आ जाते हैं

डरे हुए व्यक्ति का संपर्क - तुम्हें डरा जाएगा
निर्भय का साथ मिला तो - डर दूर भग जाएगा

हुईं होंगी हमसे कुछ गलतियाँ कि - उन ने मुहँ फेर लिया
अब दुआ है कि - उन्हें ऐसा मिले जो गलतियाँ नहीं करता

मासूम आतंक से आज़ाद नहीं - नारी शोषण से आज़ाद नहीं
अमीर शासकीय लूट से आज़ाद नहीं - ग़ुलाम या आज़ाद में लगता कोई फर्क नहीं