Monday, August 31, 2015

समर्पण ,प्यार ,त्याग ,बाद भी ....

समर्पण ,प्यार ,त्याग ,बाद भी ....
-------------------------------------
ह्रदय में दया ,करुणा एवं प्यार होने से नारी ,प्यार में सहज पड़ती है
ममता बेल ,उसमें होती , दुखी देख किसी को मन ममता उमड़ती है

जीवन मिलता , मनुष्य बढ़ता-चलता , नारी जगत धुरी में रहती है
महत्वपूर्ण  रह कर भी ,सम्मान अभाव में जीवन में अधूरी रहती है

अर्थ आश्रिता बना पुरुष ने ,विकट समाज मर्यादायें उन पर थोपीं हैं
उनके समर्पण ,प्यार ,त्याग ,बाद भी ,पुरुष धूर्तता की छुरी भोंकी है

निरंतर पुरुष छल के छिड़काव से करुणा ,वह ममता बेल सूखती है
लाचार नारी ,पुरुष धूर्तता को धूर्तता के ,अब प्रत्युत्तर दे मिलती है

गर पसंद पुरुष तुम्हें तो ,बेशक तुम वह करो ,मन तुम्हारा कहता है
पर जान लो ,बना ली स्वयं जैसी तो जीवन सुख ,ना रहा दिखता है
--राजेश जैन
01-09-2015
https://www.facebook.com/narichetnasamman

Sunday, August 30, 2015

न रखना फ़िक्र बहन जैसी .... पर ..

न रखना फ़िक्र बहन जैसी .... पर  ..   
----------------------------------------
राखी-धागों की महिमा को अब ,हमें विस्तार देना होगा
प्रौन्नत ,भाई-बहन के रिश्ते जैसी पावनता करना होगा

न जन्मता बहना का भैया ,न जन्म रही अब ,भैया की बहना
तब भी अस्तित्व ,भाई-बहन जैसे प्रेम का ,बनाये रखना होगा

ये सच है ,भाई के बहन प्रति दायित्व ,गंभीर एवं त्याग के होते हैं
भले बहन तुम न कहो ,पर ऐसी पवित्रता ,खत्म न होने देना होगा 

मेरी नहीं कोई बहन इसलिए में स्वतंत्र कुछ भी करने को हूँ
पुरुष को ऐसे विचार ,स्वछंदता से बचना और बचाना होगा

न रखना फ़िक्र बहन जैसी ,न करना त्याग किसी नारी के लिए ,तुम
पर ,ले शपथ मानवता की ,नारी को सुरक्षा एवं सम्मान ,देना होगा
--राजेश जैन
30-08-2015
https://www.facebook.com/narichetnasamman

Friday, August 28, 2015

रक्षाबंधन पर घोषणा करता है

रक्षाबंधन पर घोषणा करता है
----------------------------------
बहन ,आज रक्षा बंधन पर ,भाई तुम्हारा ,खेद सहित मानता है
बहन , जैसा मिला समाज हमें , नारी को वह नहीं सुख देता है
बहन , बाबुल के यहाँ बेटी पराई हो पलती ,कैसी यह विडंबना है
बहन , बारात सजा ले जाई जाती ,बहू वहाँ , उसे दुःख सहना है

रक्षा -बंधन भारतीय भैय्या को ,उसका कर्तव्य याद दिलाता है
रक्षा -सूत्र ,बाँधा बहनों ने वह गरिमा रक्षा का स्मरण कराता है

फेसबुक पर हैं , कई बहनें ,अश्लील तस्वीरों का सामना करती हैं
करना होता स्वस्थ चर्चा उन्हें ,पुरुषों के बुरे व्यवहार वे सहती हैं

सदबुध्दि भारतीय भाई -पिता ,बेटे को मिले ,बुरा ऐसा नहीं करें
वर्ष में एकदिन ही नहीं ,पूरे वर्ष रक्षा दायित्व अपने पर सब धरें

बहन , तुम्हारे कोमल मन को होते कष्टों को यह भाई समझता है
बहन , बदलने समाज ,सतत उपाय ,रक्षाबंधन पर घोषणा करता है
--राजेश जैन
29-08-2015
https://www.facebook.com/narichetnasamman
 

Thursday, August 27, 2015

मिली कृति बिगाड़ लें तो यह कमी स्वयं अपनी है

मिली कृति बिगाड़ लें तो यह कमी स्वयं अपनी है
-------------------------------------------------------
माँ , बहन , पत्नी , बेटी रूप में
दादी , नानी , बुआ , मौसी रूप में
नारी सबको मिलती इस रूप में
लाड़ -दुलार ,की मूरत लगती है
नारी को वासनाओं की ले चपेट में
गर्लफ्रेंड बना उससे धोखा करते हो
कहीं रखैल ,कहीं पेशा करवा उससे
कॉलगर्ल ,बारगर्ल बना नचवाते हो
अपनी आश्रिता होने के बदले ,तरसाया
उदरपूर्ति बहाने शोषण किया ,करवाया 
वैभव की महिमा भर दी निर्मल मन में
और धन प्रलोभन से नारी को ललचाया
बेबड़ी बना दिया उसे तुमने 
धुँए के छर्रे उगलवाते उससे
नारी जो पावन मूरत होती थी
विकृत रूप दे दिया उसे तुमने
उत्कृष्ट कृति ,प्रकृति से मिली थी नारी 
कामुकता से इतना बदरूप दे दिया तुमने
पराई नारी मिलती है एक धरोहर होती है
अपने मनोविकारों से उसे छल लिया तुमने
पुरुष प्रधान समाज के कर्ताधर्ता पुरुष समझो तुम
मिली कृति बिगाड़ लें तो यह कमी स्वयं अपनी है
--राजेश जैन
28-08-2015
https://www.facebook.com/narichetnasamman

 

Wednesday, August 26, 2015

नारी में ऐसी आसक्ति

नारी में ऐसी आसक्ति
--------------------------
राजनैतिक नफा नुकसान के दृष्टिगत नारी का तमाशा बनता है
फ़िल्मी सेट में व्यावसायिक लाभ के लिए ही नारी तन सजता है
पुरुष धूर्तता एवं कृतघ्नता कहें इसे कूटनीतिक लाभ दृष्टि हो या
प्रतिष्ठनों प्रति आकर्षण बढ़ाना ,फ्रंटपेज में नारी रूप ही लगता है

गृह हिंसा से ,देश में नारी नित होती है हलाकान
बलात्कार की घटनायें सुन वह रहती है भयाक्रांत
छेड़छाड़ ,बदनीयत दृष्टि का सामना नियति हुई
माँ-बेटी ,बहन ,पुरुष की ,तब भी उनसे है परेशान

देश में इतनी पुरुष संख्या , विश्व में सर्वाधिक युवा शक्ति
न लगती समाज समस्या मिटाने , नारी में ऐसी आसक्ति
नारी के बेटे , भारत माँ के सपूत राष्ट्र सृजन में लग जायेंगे
नारी को कर सुखी , उस दिन नया भारतीय समाज बनायेंगे
--राजेश जैन
27-08-2015
https://www.facebook.com/narichetnasamman

Tuesday, August 25, 2015

नारी पुराण

नारी पुराण
--------------
क्या होगा जीवन में उसके ,यह नहीं वह जानती है
पिता पुरुष , माँ नारी उसकी ,इतना वह जानती है

पुरुष-नारी साथ रहेगा ,रहते तक सृष्टि जानती है
जान आशायें 'नारी मन' में ,तुम्हें बताना चाहती है

गर्भ में आने पर वह ,बेटी हो जन्म लेना चाहती है
जन्म लिया तब बेटे जैसा ही ,देखे जाना चाहती है

देती तुम्हे सम्मान ,तुमसे सम्मान पाना चाहती है
लाजवान रही वह ,तुम्हें लाजवान देखना चाहती है

भाई देते सुरक्षा जिसमें ,वैसा समाज वह चाहती है
पति अतिरिक्त अन्य से , भाई सी नज़र चाहती है

विवाह में माँ-पिता भाई से ,दुलार उपहार चाहती है
तुम याचक बन दहेज लो , यह देखना ना चाहती है

नए परिवेश में शिक्षित होना भी ,वह अब चाहती है
कंधे से मिला अपना कंधा ,वह घर चलाना चाहती है

तुम्हारा छल रहित प्यार ,अपने लिए वह चाहती है
समर्पण रख तुमसे ,जीवन साथ निभाना चाहती है

जीवन प्रयोजन ले सैर ,बाज़ार ,यात्रा करना चाहती है
बेखटके घूमे ,छेड़छाड़ नहीं ,ऐसा वातावरण चाहती है

उठने बैठने ,वस्त्र धारण ,पुरुष सी आज़ादी चाहती है
जीवन सुख लेने देने ,'समान समाज मानक' चाहती है
--राजेश जैन
26-08-2015
https://www.facebook.com/narichetnasamman


 

Monday, August 24, 2015

बहन हो चाहत न बची ,बेटी जन्मने की हिम्मत न रही

बहन हो चाहत न बची ,बेटी जन्मने की हिम्मत न रही
-------------------------------------------------------------
हरम में रखा गुलाम बना कर ,व्यभिचार आजमाया है
पुरुष के मनोविकार ने ,काल पे कुकर्म बाढ़ ले आया है
ले चपेट में ,'नारी मन' में पवित्र प्रवाहित होती गंगा को 
कामुकता सागर में डुबो कर , पाताल लोक पहुंचाया है 

चहुँ ओर कामुकता किस्से ,साहित्य में यही समाया है
फिल्मकारों और शराब ने ,अश्लील दृश्य फिल्माया है

वैभव न रहा भलाई , लालसा हेतु सबने यह बढ़ाया है 
बचपन ,बुढ़ापे तक के जीवन को सेक्स में ही डुबाया है 

नारी समानता चाहत को ,नशा व्यसनों में भटकाया है
शोषण मुक्ति जूझती नारी को ,शोषण में ही डुबाया है
बहन हो चाहत न बची ,बेटी जन्मने की हिम्मत न रही
नारी को भोगवाद ने ,वासनापूर्ती की वस्तु ही बनाया है 
--राजेश जैन
25-08-2015
https://www.facebook.com/narichetnasamman