Monday, January 14, 2019

नहीं हसरत कोई, हम औरों से बेहतर बनें
है हसरत मगर, सब हमसे बहुत बेहतर बनें

इंसानियत अदा करने ज़िंदगी ने
दिया वक़्त कुछ हमें कि
तू जहां रोशन कर दे
गँवाया वक़्त हमने रोशन चिराग बुझा कर

इत्र से हमने खुद को महकाया, कभीं नहीं
इक हसरत खुद शख्सियत महके, हावी रही

न तुम बदले होते ना ही हमें बदलना होता
दुनिया को मोहब्बत का सुबूत मिला होता

एक दूसरे से मोहब्बत का दावा दोनों ही किया करते थे
एक बदल गया तो दूसरे ने मोहब्बत की शर्तें बदल दीं


Saturday, January 12, 2019

अपनी हस्ती को मैंने जमीं पर रखा
गिरा कई बार मगर सलामत मैं रहा

इक हसरत मेरी, शोहरत तेरी आसमां छू ले
औ इल्तजा खुदा से, कि टिकाये उसे रख दे

शिक़वा मैं कोई ज़िंदगी से नहीं करता
मेरी ज़िंदगी मेरे खुदा की दी नेमत है


Thursday, January 10, 2019

नहीं रिश्ता उससे - उसकी फ़िक्र रखते हैं
रिश्ता ए  इसांनियत  - उससे हम रखते हैं

तेरा प्यार हावी है इस कदर अब मेरे मन पर
तू प्रेरणा है लफ्ज़ औ मुस्कान की मेरे लब पर

उन्हें मोहब्बत से शिकवे, मोहब्बत को बेचैनी का सबब कहते पाया
मोहब्बत से की मोहब्बत जब हमने, ज़िंदगी का सबब इसमें पाया

खफ़ा बहुत हैं वो मगर ख़्वाब उन्हें ले आते हैं
जीने को सहारा बहुत कि ख़्वाब में वे आते हैं

उनसे है मोहब्बत, हमने दी आज़ादी उन्हें जहाँ चाहे मिलने आने की
ज़माने की बंदिशें पर, देतीं इजाज़त बस उन्हें ख़्वाब में चले आने की




Friday, January 4, 2019

नारी समस्या के समाधान के सतही प्रयास ..

नारी समस्या के समाधान के सतही प्रयास .. 

-----------------------------------------------------------------------

अगर यह कहें कि नारी जीवन में समस्याओं के समाधान के जो भी प्रयास अब तक किये गए हैं वह सतही ही हैं इसमें तनिक भी अन्योक्ति नहीं होगी। ठीक वैसे ही जैसे धरती पर उग गया विषैला पौधा छटनी कर दिया गया हो।  नारी विरुध्द अपराध की रोकथाम के कानून , नारी के लिए दैनिक जीवन में सावधानी के परामर्श या बाह्य खतरों से बचने के लिए उनका घर से कम निकलना और पर्दों और बुरकों के पीछे छिपे रहना यह सब सामान्य परिस्थितियों में ही पर्याप्त सिध्द होता है। असामान्य परिस्थिति जैसे कौमी दंगे , बाहरी देशों के आक्रमण आदि में, दुश्मन में पुरुषों से अधिक नारी को लक्ष्य किया गया है, सुबूत में देखें इतिहास में अनेकों घटनायें मिलती हैं। करीबी इतिहास पर ही दृष्टि डालें तो देश के विभाजन, श्रीमती इंदिरा गाँधी हत्याकांड के बाद भड़के दंगे,  गोधरा कांड के बाद के दंगे आदि देखने मिलेंगे जिसमें (जिसे माना) दुश्मन उसे बेइज्जत , उस पर दबाव बढ़ाने , उसे सुरक्षात्मक रहने को बाध्य करने की नीयत से (साथ ही अपनी कुत्सित हवस की पूर्ति के लिए) उनकी औरतों पर दुराचार (और अनेकों पर इस सीमा तक यौन शोषण जिसे बर्दाश्त न करने पर वे मारी गईं हैं), हत्या आदि उदाहरण बहुतायत में मिलते हैं। 
विडंबना यह है कि जब जब ऐसे हालात पैदा हुए हैं , उसे उत्पन्न करने के लिए कभी कोई नारी नहीं पुरुष ही जिम्मेदार रहे हैं। साफ़ है हर कौम ने अपने आक्रोश में शिकार अपने दुश्मन नस्ल की नारी को बनाया है, जो कसूरवार कभी नहीं थी। ये ही घटनायें हैं जिसने विवशता में परिवार, समाज और धर्म में मनुष्य को उस मानसिकता के लिए विवश किया जिसके रहने से बेटे और बेटी की जन्म से, आजीवन तक की परवरिश और उसके जीवन यापन की पध्दति ही बिलकुल अलग कर दी गई है। यही मानसिकता कारण रही है कि समान मनुष्य होने पर नारी और पुरुष समानता से नहीं देखे जाते हैं। और नारी अभिशप्त सा जीवन जीने को बाध्य होती है। इसलिए यह लेखक नारी उन्नति के सारे उपायों को सिर्फ नारेबाजी करार देता है और अब तक दिमाग में उत्पन्न उपायों को सतही का विशेषण देता है। 

(जारी ... )
--राजेश चंद्रानी मदनलाल जैन 
05.01.2019

Wednesday, January 2, 2019

तकल्लुफ़ करते उन्हें देख हैरत में हैं हम
कि क्या तख़ल्लुफ़ है जो हमने कर दिया

उनकी कमी को क्या देखें हम - बहुत कमी हैं हममें भी
बावज़ूद उनने - हमें दिल में बसा औ सिर पर बैठा रखा है 

Tuesday, January 1, 2019

नितांत अकेलापन अनुभव हो तो
घबराने की जरूरत नहीं
देखता है यह वक़्त हर कोई
इससे छुटकारा किसी को नहीं