Thursday, September 24, 2015

पुरुष को अगला जन्म नारी का


पुरुष को अगला जन्म नारी का
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तीन लोक में विराजित भगवान समीक्षा कर रहे हैं
पुरुष-नारी को दी विशिष्टाओं पर वे गौर कर रहे हैं
पुरुष को शारीरिक बल एवं नारी को ममता शक्ति
फिर ,नहीं क्यों नारी को सम्मान ,चिंतित हो रहे हैं

समक्ष रखी हरेक सामग्री का अवलोकन कर रहे हैं
विज्ञापन में अर्धनग्न ,फिल्मों में प्रदर्शित भौंडापन
शराब बोतल पर नारी मॉडल ,खेलों में चीयर लीडर
नारी शोषण ,सम्मोहन खात्मे के उपाय सोच रहे हैं

कैमरों से सूट किये वीडियो ,चित्रों ने उन्हें चौंकाया है
अश्लील डीवीडी के जखीरे से क्षोभ मन में समाया है
सोशल साइट ,अश्लील कमेंट ,पोस्ट से भरा पाया है
रेप ,छेड़छाड़ समाचारों से समाचार पत्र अटा पाया है

नारी बनाई गई उपहास ,ऐसा सबक देना जरूरी पाया है
नारी गरिमा लौटाई जा सके अब इसका समय आया है
प्रथम दृष्टया उन्होंने पुरुष को इसके लिए दोषी पाया है
पुरुष को अगला जन्म नारी का देने उन्हें विचार आया है
--राजेश जैन
24-09-2015
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Tuesday, September 22, 2015

आइटम सॉंग

आइटम सॉंग
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एक फिल्म निर्माता ने एक सुबह
सभी असिस्टेंट को बुला ,आदेश दिए
मेरी बनाई सभी फिल्मों के प्रिंट की
आप सभी सूक्ष्मता से जाँच करें

इन फिल्मों में जहाँ जहाँ भी ,नारी
उनमें दृश्य ,अश्लील तो नहीं पता करें
जहाँ भी फिल्म में आइटम सॉंग है
सॉंग और दृश्य हटा नए प्रिंट जारी करें

मुहँ लगे एक असिस्टेंट ने समझाया
साहब , फ़िल्में बिज़नेस न दे पायेंगी
इन दृश्यों के लिए किये खर्च ज्यादा
फ़िल्में ,उतनी आय भी न कमा पायेगीं

निर्माता बोले , मुझे कुछ नहीं है सुनना
जो कहा तुम सब को सिर्फ वही है करना

सुनो भगवान , मेरे सपने में कल आये थे
उन्होंने कहा , तुम अगले जन्म में नारी होगे
तुमने फिल्मों में नारी से जो दृश्य करवाये थे 
अभिनेत्री बन तुम्हें वही दृश्य सब करने होंगे

मेरी नींद तबसे उडी है , जो नारी से करवाया
उसे करने की बारी से मेरी जान पर आ पड़ी है
--राजेश जैन
22-09-2105
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Sunday, September 20, 2015

आँखों से नींद , हृदय का चैन खोया है (काल्पनिक)


आँखों से नींद , हृदय का चैन खोया है (काल्पनिक)
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बैचैन हो सोनोग्राफी के वैज्ञानिक ,रात-दिन ,दुनिया में सब तरफ
इकठ्ठे मिल बैठ ,चर्चाओं में उलझ ,मेहनत कर ,दिमाग दौड़ा रहे हैं

गर्भस्थ शिशु लिंगभेद ज्ञात होता है जिससे ,खोज सोनोग्राफी में कर
उस तरंग आवृत्ति* को ब्लॉक करने की पध्दति विकसित कर रहे हैं

पत्रकारों ने बैचैनी की वजह का पता किया तो तथ्य सामने आया है
वैज्ञानिकों का सपने में विश्व में एक साथ ,गॉड से साक्षत्कार हुआ है 
उन्हें उनकी भाषा में ईश्वर ने बताया है , अगला जन्म वैज्ञानिकों का
भारत में होना है ,साथ ही यह भी पुरुष नहीं नारी हो उन्हें जन्मना है

उस रात बाद से गहमा गहमी ये बढ़ी है जन्म हो सके ,गर्भ में न मारे जायें 
लिंग परीक्षण संभव न हो ,चिंता में आँखों से नींद , हृदय का चैन खोया है
(* २० हजार हर्ट्स से अधिक आवृत्ति की तरंगों को मनुष्य सुन नहीं सकते हैं ,उसे पराश्रव्य कहा जाता है।  इस आवृत्ति की तरंगों से सोनोग्राफी तकनीक में शरीर के अंदर की बात चित्र रूप में देखी जाती है )
--राजेश जैन
20-09-2015
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Friday, September 11, 2015

नारी …… गर्व की सूरत है


नारी …… गर्व की सूरत है
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नारी में चेतना के संचार के लिए
नारी वेदना मुक्ति उपाय के लिए
हम नितदिन आव्हान करते रहेंगे 
नारी के यथोचित सम्मान के लिए

हम एकजुट हो , उस दिन तक सक्रिय रहेंगे
नारी के सब कष्ट अथक यत्नों से दूर करेंगे
परिवर्तन ला हम ,ऐसी समाज रचना करेंगे
जिसमें नारी होने में गर्व है ,सब ऐसा कहेंगे

प्रचारित आधुनिकता आज चलन में ऐसी है
छटपटाहट में नारी ऐसी प्रतिक्रियायें देती है
सदियों से सह रही पुरुष शोषण के उपाय में  
कुँये से निकल ,शोषण की खाई में गिरती है

नारी में आत्म विश्वास ऐसा आये
हड़बड़ी में कदम गलत न उठ जाये 

नारी ,पुरुष समतुल्य मनुष्य है
पुरुष से अधिक ,न्याय मूरत है
जननी भी ,वह ममता की मूरत
दयनीय क्यों ,जो गर्व की सूरत है
--राजेश जैन
12-09-2015
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Thursday, September 10, 2015

परिवार

परिवार
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चंचल हृदय लिए विवाहित , ज़माने में निकलते हैं
अपनी ब्याहता के ह्रदय में , वे कु-शंकायें छोड़ते हैं

एकतरफ तो पत्नी से वे ,सुशील आचरण चाहते हैं
दूजी ओर , औरों की पत्नी का शीलाचार डिगाते हैं

छोड़ा यदि शीलाचार ,हमने तो सुख-शांति न बचेगी
व्यभिचार में लिप्तता ,परस्पर विश्वास नष्ट करेगी
हम मनुष्य सभ्य हुए हैं जानवर जैसे नहीं रह सकते
सुखद समाज वातावरण की सदैव हमें जरूरत रहेगी

त्याग ,प्रेम ,करुणा विश्वास से परिवार चला करते हैं
माँ ,बहन ,बेटी पत्नी प्रति दायित्व हमारे जुड़े रहते हैं
अपने परिवार ,अपनी नारियों से जो प्रत्याशा हैं हमारे
पराई नारियों प्रति सम्मान से सुनिश्चित रहा करती हैं
--राजेश जैन
11-09-2015
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Wednesday, September 9, 2015

क्यों ,किसने उसे 'राधे माँ' बनने उकसाया ?


क्यों ,किसने उसे 'राधे माँ' बनने उकसाया ?
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नारी अनेक ,आज प्रतिष्ठा अर्जित कर रहीं
किन्तु कुछ भटकाई गईं ,बदनामी सह रहीं
व्यंग , उपहास एवं तीखे लाँछनों के तीरों से
जीवन से बड़े अभिशाप सहने विवश हो रहीं

भूल अनेक कर पुरुष निर्लज्जता से जी लेता है
कोई भूल हुई नारी से ,अनदेखी ना कर पाता है

नारी की भूलों में पुरुष पीछे और साथ होता है
भूल सच्चाई को ,दोषारोपण नारी पर करता है

पुरुषों निर्मित कुछ मर्यादायें ऐसी हैं समाज में
अपनी बुराइयों में कई तर्कों से बच निकलता है
उसे जीवन भर साथ को चाहिए ,समर्पिता नारी
कृतघ्न हो ,उस कोमल नारी पर क्रूरता करता है

क्यों ,किसने उसे 'राधे माँ' बनने उकसाया ?
इन्द्राणी के मन में ,यों धन मोह क्यों समाया ?
दोष ,चलन व भ्रमित करने वालों के हम ढूँढेंगे ?
या लीपापोती कर इन पर, दूध के धुले बने रहेंगे ?
--राजेश जैन
10-09-2015
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Monday, September 7, 2015

क्यों राधे माँ ,इन्द्राणी ?

क्यों राधे माँ ,इन्द्राणी ?
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पानी में खेलने में ,मजा बहुत आता है
सिर से ऊपर वह कठिनाई बन जाता है
तैरना जिसे आता , तैर निकल आता है
न मिले बचाने वाला ,अन्य डूब जाता है

कामुकता की लहरें सब तरफ ऊँची उठ रही
मजे लेते लेते , भ्रमित पीढ़ी उसमें डूब रही
जो नियंत्रण रखते स्वयं पर ,ही बस बच रहे 
अन्य स्वयं और दूसरों को ले ,उसमें डूब रहे

नियंत्रण रख बचती रही थी अब तक ,नारी
सिर से ऊपर हुई अब कामुकता में ,डूब रही
है खेद हम पुरुषों पर ,जिनकी चपेट में ,नारी
अब ,कोई राधे माँ तो कोई इन्द्राणी बन रही

दोष नहीं नारी में ,स्वयं पुरुष में ढूँढना होगा
क्यों राधे माँ ,इन्द्राणी? उपाय ढूँढ ,करना होगा
--राजेश जैन
 08-09-2015
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