Monday, January 5, 2015

गर्लफ्रेंड -एक चरित्र चित्रण

गर्लफ्रेंड -एक परिभाषा
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लेखक पुरुष है इसलिये बॉयफ्रेंड पर लिखना सरल था। इस पेज का एडमिन होने से मैसेज बॉक्स में आई माँग कि "गर्लफ्रेंड चरित्र चित्रण" करूँ , लेखक ने पढ़ी। पुरुष लेखनी से ऐसा किया जाना , खतरों से भरपूर है। लेखक के लिए खतरे नहीं हैं , लेकिन नारी -पुरुष संबंध , जो परस्पर दोषारोपण से कटु बन रहे हैं , उनमें कटुता और बढ़ जाने के खतरे हो सकते हैं।
नारी सदियों से ,परिवार में पुरुष साथ निभा रही है। सभी नारी , न मानती हों किन्तु अधिकाँश ,पुरुष साथ (पिता,भाई ,पति और पुत्र ) में अपनी सुरक्षा मानती हैं। सुरक्षा की ऐसी निर्भरता , के कारण कहीं-कहीं पुरुष द्वारा ,  नारी पर कई तरह का शोषण किये जाते हैं । कहीं-कहीं , दुष्टता में पुरुष नारी का दैहिक शोषण कर रहे हैं , कहीं उसे आत्महत्या -करने तक पर विवश कर रहे हैं , कहीं उसकी हत्या तक करते हैं । नारी को देह व्यापार से आजीविका को बाध्य करना भी किसी भी सभ्य मनुष्य समाज के लिये कलंक ही है।
"नारी -अपनी सामाजिक दशा से आहत है " , जो शोषण की सीधा शिकार है वह तो है ही , जो सुरक्षित है , घर -परिवार ,समाज और वर्कप्लेस में सम्मान पा रही है , वह भी , क्योंकि नारी पर शोषण के बनते नित नये समाचार , उसे अपनी सुरक्षा को सशंकित करते हैं। इसलिये भी कि नारी जीवन की कठिनाई वह अनुभव करती है , किसी नारी पर ऐसा अत्याचार , उनके जीवन को कितना अभिशापित कर देगा , इसकी कल्पना वह सरलता से कर सकती है । नारी , पुरुष की तुलना में ज्यादा दयालु भी है , करुणा उसके स्वभाव में है।
जब कोई आहत है तो उसका उपचार आवश्यक होता है। उपचार का उद्देश्य हमेशा सुधार का होता है। उपचार में सावधानी आवश्यक है , उपचार के प्रयास में ,घाव ज्यादा बिगाड़ देना या ज्यादा आहत कर देना , वाँछित नहीं है।  इतनी भूमिका के बाद अब -
फोकस , किशोरी और अविवाहित युवतियों (Teen agers & Unmarried young women ) पर करूँगा । गर्लफ्रेंड , उन्हें ही कहा जा रहा है . जो नहीं हैं तो उन्हें गर्लफ्रेंड बनाने की कोशिशें जारी रहती हैं।
कौन हैं ये किशोरियाँ , या अविवाहित युवतियाँ ?
निश्चित ही किसी परिवार की पुत्री या बहन हैं।
परिवार इन्हें शिक्षा को और व्यवसाय को किस उद्देश्य से स्कूल /कॉलेज या जॉब में भेजता है? 
वे किसी की गर्लफ्रेंड बनें ?
या इसलिये कि वे उन्नति करें , स्वयं सक्षम बने , जीवन में अपना सम्मान सुनिश्चित करने की योग्यता अर्जित करें। तथाकथित गर्लफ्रेंड होना , स्वयं किशोरियों और युवतियों (Teen agers & Unmarried young women ) की उन्नति में बाधक है . परिवार जिस लक्ष्य से उन्हें अवसर देता है , उसकी पूर्ती में बाधक है। 
क्योंकि गर्लफ्रेंड बन जाना , शिक्षा से उसका ध्यान बाँटता है। समय ख़राब करता है। गर्लफ्रेंड होने पर  असमय उन्हें दैहिक संबंधों में उलझना है। उसके बाद अधिकाँश ऐसे संबंधों का टूट जाना है। उसमें से अनेकों , में ब्लैक मेलिंग है। ब्लैक मेलिंग नहीं है तब भी , भविष्य में उनका भेद खुलना आशंकित होता है। जो वैवाहिक संबंधों के सुखदता पर खतरा है। अन्य का बॉयफ्रेंड रहा , अब पति होकर -अपनी पत्नी का पास्ट में किसी की गर्लफ्रेंड होना सहजता से स्वीकार नहीं करता।
नारियों और पुरुषों का तर्क हो सकता है , गर्लफ्रेंड का मतलब , दैहिक रिलेशनशिप में पड़ना है ही , नहीं। तब लेखक कहता है गर्लफ्रेंड ऐसी है तो यही उसका सम्पूर्ण चरित्र चित्रण है। वह जॉब में /शिक्षा में और साथ में दैहिक अपेक्षा के बिना , इन्वॉल्वमेंट के बिना पुरुष साथ उसी सहजता से लेती है जैसा की कोई गर्ल - अपनी सहेली से लेती है। 
अगर सभी को गर्लफ्रेंड का यह चरित्र स्वीकार है तो इसे ऐसा परिभाषित करते हैं। "किसी बॉय का फ्रेंड जब कोई गर्ल होती है तो वह गर्ल होने से गर्लफ्रेंड कही जाती है। जहाँ लड़के -लड़के के बीच जैसा ही दैहिक संबंध प्रश्न से परे होता है । जिसमें गर्ल और बॉय के बीच सहज आकर्षण से कोई ऐसा दैहिक संबंध न बने इसका पूरा नियंत्रण रहता है। गर्ल जब इन मर्यादाओं में बॉय से फ्रेंडशिप रखती है तो वह गर्लफ्रेंड कहलाती है। "
अन्यथा वह स्वयं मूर्ख बन कर , अपने परिवार , माँ -पिता ,भाई और बहन के उस पर रखे विश्वास को छल लेती है। स्वयं को संकट में डाल , पूरे परिवार के मान और जीवन को भी संकट में डालती है।  वह गर्लफ्रेंड नहीं होती है। छली गई एक मनुष्य होती है , जिनसे लेखक को वही सहानुभूति होती है जैसी उसे एक पिछड़े -अभावग्रस्त मनुष्य से होती है .
गर्लफ्रेंड की परिभाषा में एक विस्तार और जो आलेख को पूर्ण करता है।
"जब परिवार सहमति से अथवा वयस्क होने पर , किसी गर्ल/युवती का किसी पुरुष से उनके बीच मित्रता संभावित विवाह के लिये एक दूसरे को जानने /समझने के लिए होती है। जिसमें विवाह होने तक दैहिक इन्वॉल्वमेंट नहीं होता है। तब ऐसी गर्ल की ऐसी मित्रता को गर्लफ्रेंड होना कहा जा सकता है।
यह 'बात भी टूट जाने' की सम्भावना रहती है . इसलिए इसमें भी यौन संबंध निरापद (Safe)  नहीं होते हैं।
बिना किसी शर्तों की गर्लफ्रेंड , "पत्नी" ही अपने पति की होती है।

जो युवतियाँ किसी की गर्लफ्रेंड हो इन सीमाओं को पार कर चुकीं हैं , वे शायद पढ़कर लेखक से असहमति रखेंगी । इस असहमति के कारण , उनका मन लेखक को खरी-खोटी ,सुनाने का हो सकता है। स्वागत है ,अपनी भड़ास ,अवश्य निकालें। किन्तु तब भी लेखक की सलाह यही होगी , कि वे तुरंत भूल सुधार करें ,आत्मनियंत्रित हों , सीमाओं के अंदर लौटें। सुबह का भूला शाम को घर लौटे , तो समाज शायद उसे भूला न कहे।
--राजेश जैन
05-01-2015
 

Sunday, January 4, 2015

क्षणिकायें -निरंतर

क्षणिकायें -निरंतर
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तूफ़ान
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"झूठे , क्यों पत्नी को तूफ़ान
यहाँ -वहां जतलाते रहते हो
भागते जब तूफ़ान आता है
पर पत्नी को आँख दिखाते हो "
राजेश जैन
पुरुष -नारी
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"पुरुष नारी के अंतर खोजती ?
दोनों ही मनुष्य एक समान हैं
कभी पुरुष , नारी सा करता
कहीं नारी पुरुष से आगे होती हैं "
राजेश जैन
04-01-2015
प्यार
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"रोना, रुला लेना जरुरी नहीं
की सच्चा प्यार ही होता है
साथ दे बुलंदी पर पहुँचाना
प्रिय ,सच्चा प्यार होता है "
राजेश जैन
04-01-2015
सच
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"सच ही एक ऐसी शक्ति है
दबके भी खड़ी हो सकती है
झूठ कितना कह लिया जाए
झूठ पे सच की जय होती है "
राजेश जैन
04-01-2015
भीड़
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"भीड़ से अलग दिखने की चाहत
हमें भीड़ से अलग नहीं करती है
विश्वासपूर्वक अच्छे पथ चलना
धैर्य ,हमें भीड़ से अलग करती है "
राजेश जैन
04-01-2015
खता
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"खता जरुरी नहीं आपकी
जिससे कोई चुप होता है
खता अपनी अनुभव कर
दिल मेरा जार जार रोता है "

--राजेश जैन
04-01-2015


 

Saturday, January 3, 2015

पपीता


पपीता
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हम घर में , या किसी के यहाँ जाते हैं। अगर पपीता हमारे सम्मुख रखा जाता है , तो कैसे ?
उसके बीजे ,हटाकर , और उसका छिलका उतार कर , है ना ?
अगर छिलका नहीं भी उतारा गया हो तो हम , उसे कैसे खाएंगे ?
छिलका , बचाकर , उसका दल , है ना ?
अर्थात ग्रहण कर लेने वाली भाग , हमने ग्रहण किया , अग्रहणीय छोड़ दिया।
जबकि पपीता में तो दोनों ही हैं।
फेसबुक
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पपीता भाँति फेसबुक में (बल्कि लगभग सारी चीजों में ) भी दोनों तरह की वस्तु हैं , कुछ ग्रहण करने योग्य , जो हमारी उन्नति में सहायक होती हैं , हमें अच्छा मनुष्य बनाती हैं।  और दूसरी ,अग्रहणीय , ख़राब वस्तु , जो हमारी प्रगति रोकती हैं , समय ख़राब करती हैं , और हमें दुर्जन मनुष्य बनाती हैं।
बच्चों से
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लेखक अपने बच्चों को शिक्षा को जाते , यह कहता आया है , पपीता के तरह स्कूल /कॉलेज में भी पपीता की तरह दोनों ,बातें उपलब्ध मिलेंगी , तुम ज्ञान ,और मोरल वहाँ से ग्रहण करना , और दूसरी बातें , जो तुम्हें , साथी बच्चों द्वारा आधुनिकता के नाम पर ,और मजे के नाम पर बताई जायेंगी (ड्रग,स्मोक,ड्रिंक्स , जुआं और फ्लिर्टिंग ) उसे पपीता के छिलके जैसे अलग करना।
नारी चेतना और सम्मान रक्षा
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गर्ल्स , वर्किंग वीमेन और समस्त नारी जाति को इस पेज से , देशो-दुनिया और समाज की सारी वस्तुओं के सभी पक्ष शालीन और संयत भाषा में प्रस्तुत करने के प्रयास किये जाते हैं।  अच्छाई और बुराई , पृथक -पृथक कर बताने के प्रयास किये जाते हैं। सभी सामग्री / बातों या वस्तुओं में हमें लाभ देने वाले और हानिकारक या अरुचिकारक तत्व विध्यमान मिलते हैं। नारी अपने सम्मान रक्षा को संघर्षशील है। उसे चेतना दिए जाने के प्रयास निरंतर रखे जाते हैं , ताकि नारी सम्पूर्ण गरिमा से जी सके , परिवार और समाज का बेहतर ढंग से सहारा बन सके।
परिचित नारी
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लेखक की एक परिचित नारी , जो अच्छा अनुभव रखती हैं , नारी होने के साथ , नारी जगत को अच्छा मार्गदर्शन दे सकती हैं , लेखक से कहती हैं , कुछ सुधरने वाला नहीं समाज में , व्यर्थ जायेंगे एफर्टस सारे। फेसबुक पर थीं ,डीएक्टिवेट कर लिया ,कहती हैं डीपी ही इतनी गन्दी देखने मिलती हैं , पति कहते fb ना करो , अच्छी बात है जीवनसाथी की सलाह से कार्य करना। किन्तु , इस निराशा से , वंचित हैं ,बच्चे -एक अच्छे मार्गदर्शक से।
एनआरआई
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पोस्ट लगाई लेखक ने कवि बनकर ,एनआरआई मित्र ने प्रश्न लगाया
पोस्ट -
इस देश की माटी में पले
माटी का कर्ज भुला गए
शिक्षित तो इस देश हुए
परदेश प्रगति में जुट गए
--राजेश जैन ...
03-01-2015

कमेंट -iss main iss desh kee kami hai. iss desh ka system barbaad hai
16 hrs · Unlike · 1
  •  Rajesh Jain कौन बर्बाद को सुधरेगा ?
    15 hrs · Like
    (प्रति कमेंट )

  • हमारे देश की समस्या हल करने और सिस्टम सुधारने , अमेरिका वाले आएंगे या फ्रांस वाले ?
    या हमें करना होगा।  ना करें हम! विश्वास रखें हमारी अगली पीढ़ी कर लेगी , सब ठीक --- अच्छी बात है ?

    --राजेश जैन
    04-01-2105

     

    क्षणिकायें

    क्षणिकायें
    लक्ष्य
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    लक्ष्य अगर नज़र में है
    मंज़िल पास ,नहीं दूर है
    पहुंचेंगे भव्य मंज़िल पे
    अहं रखना नियंत्रण में हैं

    --राजेश जैन
    04-01-2015


    जिक्र -फ़िक्र
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    फ़िक्र छोडो उस बन्दे की
    जिक्र हमारी न कर सकता
    फ़िक्र करो अपने जीवन की
    अनेको सम्भावना जो रखता

    --राजेश जैन
    03-01-2015


    प्रगति
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    इस देश की माटी में पले
    माटी का कर्ज भुला गए
    शिक्षित तो इस देश हुए
    परदेश प्रगति में जुट गए

    --राजेश जैन
    03-01-2015


    ठोकर
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    "ठोकर खाकर सीखने को तो
    मौके अनायास आ जाते हैं
    सीखे अनुभव ले अन्य से, वे
    जीवन घाव कम ही खाते हैं "

    --राजेश जैन
    04-1-2015


    समय
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    "रोना समय का बहुत होता है
    समय सभी का होता,आता है
    उसमें जब कर गुजरे कोई
    वह समय सदुपयोग कहाता है "

    --राजेश जैन
    04-01-2015


    सपना
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    उठ गये फिर लो हम आज सबेरे
    नया सपना लिए जागी आँखों में
    पूरा करने लो हम जुट गए सबेरे
    उपलब्धि शाम तक होगी बाँहों में

    --राजेश जैन
    04-01-2015

    Friday, January 2, 2015

    यज्ञ करेंगे , यज्ञ करेंगे

    यज्ञ करेंगे , यज्ञ करेंगे
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    लड़का और लड़की नहीं कोई ख़राब होते हैं
    सब अपने माँ-पिता की जीवन आस होते हैं
    माता-पिता का जिन्हे न मिला प्यार होता है
    दुर्भाग्यशाली ऐसा वह सहानभूति पात्र होता है

    मनुष जीवन सृष्टि प्रदत्त वरदान एक होता है
    इसलिए सब अच्छे हैं ये सन्देश हमारा होता है
    सबके मन में सजे ,सुखद जीवन सपने होते हैं
    सपनों से सद्प्रेरित ही जीवन विकसित होते हैं
    घुले अति कामुकता सपनों मे ये ख़राब होते हैं
    अति कामुकता के बने स्त्रोत ही ख़राब होते हैं
    स्त्रोत बने मनुष्य में विचार ये ख़राब होते हैं
    दूषित विचार मिटायें ये आव्हान हमारे होते हैं
     
    काव्य पंक्तियों के माध्यम से , मनुष्य श्रेष्ठ है ऐसा बताने के उपरान्त उन्हें ख़राब कहने का औचित्य नहीं होता है। ऐसे में समाज में खराबी हम देखते हैं तो वह , मनुष्य होने की खराबी नहीं है . अपितु वह मनुष्य मन पर हावी होने वाली किसी बात की , "अति" की खराबी है। संक्षिप्त लेखन समझदारों के लिए पर्याप्त होता है ,अतः अब सीधे विषयवस्तु पर लिखता हूँ -
    नारी ,  "अति कामुकताधारी " पुरुष एवं नारी स्त्रोतों  द्वारा फैलाये गए जालों में उलझ रही है।
    विडंबना यह है , कि ऐसे जाल को बुनने में , नारी का ही उपयोग किया जा रहा है .
    ऐसे 'जाल के बिछाने' का षणयंत्र करने वाले "अति कामी "के मन में कामुकता की उनकी तृप्ति ही अकेला उद्देश्य नहीं होता है। उससे अनेकों व्यावसायिक लाभ भी उनके उद्देश्य होते हैं। कामुकता प्रसारित करने में छिपे लाभ निम्नानुसार हैं .



    1. कामोत्तेजक आधुनिक परिधानों के निर्माण और व्यापार से लाभ।
    2. कामोत्तेजना बढ़ाने वाली औषधियाँ उत्पादन  और व्यापार से लाभ।
    3. कामुकता जनित रोग की दवा निर्माण से लाभ।
    4. ड्रिंक्स और नशीले ड्रग्स , उत्पादन और उसके व्यवसाय से लाभ।
    5. परफ्यूम और सौंदर्य प्रसाधन के निर्माण बढ़ोतरी और व्यापार से लाभ।
    6. कामुकता के प्रति दर्शक उत्सुकता बढ़ा कर , फिल्म /वीडियो निर्माण से लाभ।
    7. कामुकता के एम्बेसेडर(सिने हीरो) एवं अन्य सेलिब्रिटी को प्रतिष्ठा का लाभ।
    8. कामुकता के विचारों में उलझाये रख , सामान्य व्यक्तियों का ध्यान हटा , ख़राब कारनामों से, अपनी प्रतिष्ठा हानि बचाने में सुविधा। 




    इन व्यक्तिगत लाभों से समाज को क्या क्षति हो रही है , इस बात का षणयन्त्रकारियों को कोई यह लेना देना नहीं है। इस उकसावे से मनोरोगी हो , कोई दुष्ट बन , नारी पर कोई पुरुष अपराध कर बैठता है , उसको फाँसी दे देना हल नहीं है।  कहाँ-कहाँ ,कितनों-कितनों  को फाँसी दी गई है,कितनों को दी जा सकती है ?यह तो बार बार उग आती विष बेल की तरह है  यदि सतह के ऊपर से इसकी सफाई की जाती है तो  यह श्रम तो जीवन भर उलझाये रखेगा , व्यर्थ जाता रहेगा। हर अगले पल , खुलेआम या छिपे तौर पर नारी विरुध्द अपराध होता रहेगा। इसका स्थायी उपचार , जड़ पहचान कर , उसे ही नष्ट करने में है।
    प्रबुध्द नारी एकजुट हो कर  और वे पुरुष जो अपने को माँ (नारी) की भी संतान मानते हैं , आगे आयें।  एक बार ही , सही श्रम करके , बार -बार की इस झंझट से छुटकारा पायें। इस विषबेल की जड़ भूमि के भीतर ही रोक दें।  इस तरह अपनी, माँ ,पत्नी, बहन और बेटी के लिए सुरक्षित और सम्मान का जीवन सुनिश्चित करें।
    लेखक का प्रयोजन , अश्वमेघ का है , जिसे सबके सयुंक्त प्रयास से संपन्न किया जा सकता है। 
    हम सब समवेत हो यह यज्ञ करें । अपने में जन्मी अति कामुकता की आहुति दें। षणयंत्रकारियों के सम्मोहन जाल में फँसने की अपनी नादानी की  आहुति दें। यह यज्ञ सफल हो सकता है।  इस सम्बन्ध में  इस लेखक / नौसिखिये कवि की निवेदित फिर चार काव्य पंक्तियाँ और कृपया पढ़ लें   -

    अपनी अपेक्षाओं का अश्व ,रोक दिया जाता है
    सहायता को दौड़े अश्व ,कोई रोक नहीं पाता है
    अपार हर्ष से स्वागत उसका, अभिनंदित अश्व
    अश्वमेघ में विश्व विजय पताका ,ले , आता है

    --राजेश जैन
    03-01-2015



     

    Thursday, January 1, 2015

    रिस्पेक्ट गर्ल्स

    रिस्पेक्ट गर्ल्स
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    लेखक तीन वर्ष पहले ,फेसबुक पर आना समय की बर्बादी , मानता था। फिर , बड़े हो रहे पुत्र ,बहन -बेटी को , दुनिया की अच्छाई -बुराई से परिचित कराने के लिए फेसबुक पर क्या होता है , अवलोकन करने के प्रयोजन से फेसबुक पर आईडी बना फेसबुक पर आ गया। । भूमिका इतनी ही पर्याप्त है। अब आज का लेख -
    फेसबुक पर , युवा (और शायद अधेड़ पुरुष भी ) फेक , गर्ल्स आईडी साथ आ बैठे हैं। जिन्होंने अच्छे अच्छे नामों से ग्रुप बना रखें हैं , यथा , "रिस्पेक्ट गर्ल्स ", "सेव गर्ल्स" ,"बेटी अनमोल" आदि (एक उदाहरण ऐसे कुछ पेज अच्छे भी हैं )। पेज भी लड़कियों की सुंदर तस्वीरों के और सुंदर नाम के बना लिए हैं। नाम और तस्वीर से आकर्षित हो ,कोई माँ -बहन ,पत्नी या बेटी युवा ,और नये बच्चे इन पर जब जाते हैं , वहाँ के कंटेंट (नारी देह के घिनौने जुलूस में से ) , घिनौनी तस्वीर होते हैं। मन में भरी कुंठा और मनोविकृति से निकले भद्दे कमेंट्स होते हैं। इतनी अश्लील कहानी होती हैं , जिनमें पवित्र रिश्तों  (भाई-बहन , माँ-पुत्र , पिता-पुत्री इत्यादि ) तक में कामवासना का विष घोल दिया होता है।
    बहन -बेटियाँ या संभ्रांत , प्रबुध्द वर्ग ना चाहते हुए , इनका साक्षी हो जाता है। संस्कारों में पले बच्चे , विशेषकर गर्ल्स , अपने ही से प्रश्न करने लग जाती हैं -क्या हम ज़माने से बहुत पीछे रह गए हैं।उनका संस्कारित मन , निरर्थक द्वन्द में पड़ जाता है।
    इस माटी का भव्य भारत पुत्र , किसान हुआ करता था। वह अनाज बोकर ,अनाज पैदा करता था , सबको उपलब्ध करा अपना भरण पोषण करता था। उस दयालु किसान के ने अपने बेटे-बेटियों को पढ़ाने -लिखाने , उन्नति करने बड़े कॉलेज /बड़े शहरों में भेजा। बच्चे षणयंत्र और सम्मोहनों में इस तरह मनोव्याधि ग्रस्त हो गए , बहरूपिये बन गए। जन्मे तो पुरुष , लेकिन मनोग्रंथि के शिकार हो नारी आईडी से नारी पहचान बना रहे हैं।
    "स्वयं नहीं मालुम क्या बो रहे
    क्या उपजायेंगे ,वे क्या काटेंगे
    पत्नी -बहन के संस्कार बिगाड़
    पत्नी ,बेटे-बेटी में क्या पायेंगे "
    भव्य भारत , जिन संस्कारों और जिन मानवीय आदर्शों के लिए जाना जाता था , आज वह लुप्त हो रहे हैं . शेष विश्व खुश हो रहा है कि हमारी एक आँख फूटी थी , हमने आँखों वालों की भी एक आँख फोड़ ली।
    इस पेज से जुड़ने वाले पुरुष ,आत्मलोकन करें , गर्ल्स कहीं दिग्भ्रमित ना हों , उनकी -अपरिचित साथी गर्ल्स क्या कर रही हैं? इतना घिनौना कर रही हैं? ,देख व्यग्र और भ्रमित न हों। ये गर्ल्स नहीं जो इस तरह लिख और दिखा रही हैं , ये बहरूपिये विकृति के शिकार हमारे भाई और चाचा हैं , यदि गर्ल्स भी हैं तो वे हैं , जिनका मनोमस्तिष्क शोषण और धन प्रलोभन से हिला दिया गया है।  आत्मविश्वास रखें , भारतीय गर्ल्स अभी भी विश्व की सब से ज्यादा संस्कारित गर्ल्स हैं।
    "आत्मविश्वास से पढ़ जाने का लाभ सही लें ,
    भारती अपने कार्यों से चलन की दिशा मोड़ दें
    उन्हें जरूरत पाश्चात्य नारी सी बनने की नहीं
    वे गंगा ,पाश्चात्य नारी में निज पवित्रता घोल दें "

    कल इस पेज का लक्ष्य शोध और डॉक्टरेट निरूपित किया गया है।  आज इस का अभिप्राय एक यज्ञ बताया जाता है , कैसा यज्ञ आगामी लेख में।
    (नोट - लेखक स्थापित साहित्यकार नहीं है , ऐसे साहित्यकार के मन में पढ़ यह प्रश्न आता होगा , यह लेखक , कभी कवि बन जाता है , और न जाने किस विधा को निभाता काव्य लिखता है ? हर एक मौलिक पंक्ति की प्रस्तुति के साथ  इस आधे अधूरे कवि का विनम्र और मासूम उत्तर इसे "भाव विधा" ठहराता है )
    --राजेश जैन
    02-01-2015

    माँ के सोने के गहने

    माँ के सोने के गहने
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    सुदृढ़ , तुम्हें , मालूम है न, हम ग्रामीण पृष्ठभूमि के गरीब किसान हैं … पिता , कह रहे थे , सुदृढ़ , पुणे में जॉब ज्वाइन करने जाने की पैकिंग करते हुए सुन रहा था। तुम्हारी , इंजीनियरिंग की फीस के लिये , तुम्हारी माँ के सोने के गहने बिके हैं , तुम्हें मालूम है न सुदृढ़?
    सुदृढ़ -हाँ , बाबा , मै जॉब से कमा कर उन्हें बनवाऊँगा ,सोने के गहने।
    पिता - मै ,ऐसा करने नहीं कह रहा ,बेटे ! .......  कुछ रुक के पुनः कहते हैं - इसलिए कह रहा हूँ , इतनी दूर जा रहा है , कोई ख़राब काम न करना बेटे , इतनी दूर से हमें पता भी न चलेगा।   सुदृढ़ , हाथ का काम छोड़ , बाबा के पास , आता है , कहता है  .... बाबा , विश्वास रखो , मुझे माँ और आपके लिये अपनी जिम्मेदारी का अहसास है , कहते हुए , बाबा और पास बैठी , माँ के चरण स्पर्श करता है।
    इस बात को लगभग ढाई महीने हुए ,सुदृढ़ ने पुणे में आ जॉब ज्वाइन किया है। आज ,नये वर्ष के सेलिब्रेशन में , सभी कंपनी एम्पलॉयी पी -खा रहे थे।  सुदृढ़ , ड्रिंक नहीं करता था वह चाय पी रहा था। तब जबरन फ्रेंड्स उसे उठा , खींच ले गये यह कहते , नये वर्ष में पियेगा नहीं तो वर्ष भर खाक , मजा करेगा।
    सुदृढ़ के मन में पापा की कहते हुए वह छवि घूम रही थी , अनमना वह जाकर , पहली बार ड्रिंक शिप कर रहा था , और छूटा ये चाय का गिलास , सुदृढ़ के बदलने का दृश्य देख तनहा ही जैसे खेद कर रहा था।  
    --राजेश जैन
    -०१-०१-२०१५