गर्लफ्रेंड -एक परिभाषा
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लेखक पुरुष है इसलिये बॉयफ्रेंड पर लिखना सरल था। इस पेज का एडमिन होने से मैसेज बॉक्स में आई माँग कि "गर्लफ्रेंड चरित्र चित्रण" करूँ , लेखक ने पढ़ी। पुरुष लेखनी से ऐसा किया जाना , खतरों से भरपूर है। लेखक के लिए खतरे नहीं हैं , लेकिन नारी -पुरुष संबंध , जो परस्पर दोषारोपण से कटु बन रहे हैं , उनमें कटुता और बढ़ जाने के खतरे हो सकते हैं।
नारी सदियों से ,परिवार में पुरुष साथ निभा रही है। सभी नारी , न मानती हों किन्तु अधिकाँश ,पुरुष साथ (पिता,भाई ,पति और पुत्र ) में अपनी सुरक्षा मानती हैं। सुरक्षा की ऐसी निर्भरता , के कारण कहीं-कहीं पुरुष द्वारा , नारी पर कई तरह का शोषण किये जाते हैं । कहीं-कहीं , दुष्टता में पुरुष नारी का दैहिक शोषण कर रहे हैं , कहीं उसे आत्महत्या -करने तक पर विवश कर रहे हैं , कहीं उसकी हत्या तक करते हैं । नारी को देह व्यापार से आजीविका को बाध्य करना भी किसी भी सभ्य मनुष्य समाज के लिये कलंक ही है।
"नारी -अपनी सामाजिक दशा से आहत है " , जो शोषण की सीधा शिकार है वह तो है ही , जो सुरक्षित है , घर -परिवार ,समाज और वर्कप्लेस में सम्मान पा रही है , वह भी , क्योंकि नारी पर शोषण के बनते नित नये समाचार , उसे अपनी सुरक्षा को सशंकित करते हैं। इसलिये भी कि नारी जीवन की कठिनाई वह अनुभव करती है , किसी नारी पर ऐसा अत्याचार , उनके जीवन को कितना अभिशापित कर देगा , इसकी कल्पना वह सरलता से कर सकती है । नारी , पुरुष की तुलना में ज्यादा दयालु भी है , करुणा उसके स्वभाव में है।
जब कोई आहत है तो उसका उपचार आवश्यक होता है। उपचार का उद्देश्य हमेशा सुधार का होता है। उपचार में सावधानी आवश्यक है , उपचार के प्रयास में ,घाव ज्यादा बिगाड़ देना या ज्यादा आहत कर देना , वाँछित नहीं है। इतनी भूमिका के बाद अब -
फोकस , किशोरी और अविवाहित युवतियों (Teen agers & Unmarried young women ) पर करूँगा । गर्लफ्रेंड , उन्हें ही कहा जा रहा है . जो नहीं हैं तो उन्हें गर्लफ्रेंड बनाने की कोशिशें जारी रहती हैं।
कौन हैं ये किशोरियाँ , या अविवाहित युवतियाँ ?
निश्चित ही किसी परिवार की पुत्री या बहन हैं।
परिवार इन्हें शिक्षा को और व्यवसाय को किस उद्देश्य से स्कूल /कॉलेज या जॉब में भेजता है?
वे किसी की गर्लफ्रेंड बनें ?
या इसलिये कि वे उन्नति करें , स्वयं सक्षम बने , जीवन में अपना सम्मान सुनिश्चित करने की योग्यता अर्जित करें। तथाकथित गर्लफ्रेंड होना , स्वयं किशोरियों और युवतियों (Teen agers & Unmarried young women ) की उन्नति में बाधक है . परिवार जिस लक्ष्य से उन्हें अवसर देता है , उसकी पूर्ती में बाधक है।
क्योंकि गर्लफ्रेंड बन जाना , शिक्षा से उसका ध्यान बाँटता है। समय ख़राब करता है। गर्लफ्रेंड होने पर असमय उन्हें दैहिक संबंधों में उलझना है। उसके बाद अधिकाँश ऐसे संबंधों का टूट जाना है। उसमें से अनेकों , में ब्लैक मेलिंग है। ब्लैक मेलिंग नहीं है तब भी , भविष्य में उनका भेद खुलना आशंकित होता है। जो वैवाहिक संबंधों के सुखदता पर खतरा है। अन्य का बॉयफ्रेंड रहा , अब पति होकर -अपनी पत्नी का पास्ट में किसी की गर्लफ्रेंड होना सहजता से स्वीकार नहीं करता।
नारियों और पुरुषों का तर्क हो सकता है , गर्लफ्रेंड का मतलब , दैहिक रिलेशनशिप में पड़ना है ही , नहीं। तब लेखक कहता है गर्लफ्रेंड ऐसी है तो यही उसका सम्पूर्ण चरित्र चित्रण है। वह जॉब में /शिक्षा में और साथ में दैहिक अपेक्षा के बिना , इन्वॉल्वमेंट के बिना पुरुष साथ उसी सहजता से लेती है जैसा की कोई गर्ल - अपनी सहेली से लेती है।
अगर सभी को गर्लफ्रेंड का यह चरित्र स्वीकार है तो इसे ऐसा परिभाषित करते हैं। "किसी बॉय का फ्रेंड जब कोई गर्ल होती है तो वह गर्ल होने से गर्लफ्रेंड कही जाती है। जहाँ लड़के -लड़के के बीच जैसा ही दैहिक संबंध प्रश्न से परे होता है । जिसमें गर्ल और बॉय के बीच सहज आकर्षण से कोई ऐसा दैहिक संबंध न बने इसका पूरा नियंत्रण रहता है। गर्ल जब इन मर्यादाओं में बॉय से फ्रेंडशिप रखती है तो वह गर्लफ्रेंड कहलाती है। "
अन्यथा वह स्वयं मूर्ख बन कर , अपने परिवार , माँ -पिता ,भाई और बहन के उस पर रखे विश्वास को छल लेती है। स्वयं को संकट में डाल , पूरे परिवार के मान और जीवन को भी संकट में डालती है। वह गर्लफ्रेंड नहीं होती है। छली गई एक मनुष्य होती है , जिनसे लेखक को वही सहानुभूति होती है जैसी उसे एक पिछड़े -अभावग्रस्त मनुष्य से होती है .
गर्लफ्रेंड की परिभाषा में एक विस्तार और जो आलेख को पूर्ण करता है।
"जब परिवार सहमति से अथवा वयस्क होने पर , किसी गर्ल/युवती का किसी पुरुष से उनके बीच मित्रता संभावित विवाह के लिये एक दूसरे को जानने /समझने के लिए होती है। जिसमें विवाह होने तक दैहिक इन्वॉल्वमेंट नहीं होता है। तब ऐसी गर्ल की ऐसी मित्रता को गर्लफ्रेंड होना कहा जा सकता है।
यह 'बात भी टूट जाने' की सम्भावना रहती है . इसलिए इसमें भी यौन संबंध निरापद (Safe) नहीं होते हैं।
बिना किसी शर्तों की गर्लफ्रेंड , "पत्नी" ही अपने पति की होती है।
जो युवतियाँ किसी की गर्लफ्रेंड हो इन सीमाओं को पार कर चुकीं हैं , वे शायद पढ़कर लेखक से असहमति रखेंगी । इस असहमति के कारण , उनका मन लेखक को खरी-खोटी ,सुनाने का हो सकता है। स्वागत है ,अपनी भड़ास ,अवश्य निकालें। किन्तु तब भी लेखक की सलाह यही होगी , कि वे तुरंत भूल सुधार करें ,आत्मनियंत्रित हों , सीमाओं के अंदर लौटें। सुबह का भूला शाम को घर लौटे , तो समाज शायद उसे भूला न कहे।
--राजेश जैन
05-01-2015
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लेखक पुरुष है इसलिये बॉयफ्रेंड पर लिखना सरल था। इस पेज का एडमिन होने से मैसेज बॉक्स में आई माँग कि "गर्लफ्रेंड चरित्र चित्रण" करूँ , लेखक ने पढ़ी। पुरुष लेखनी से ऐसा किया जाना , खतरों से भरपूर है। लेखक के लिए खतरे नहीं हैं , लेकिन नारी -पुरुष संबंध , जो परस्पर दोषारोपण से कटु बन रहे हैं , उनमें कटुता और बढ़ जाने के खतरे हो सकते हैं।
नारी सदियों से ,परिवार में पुरुष साथ निभा रही है। सभी नारी , न मानती हों किन्तु अधिकाँश ,पुरुष साथ (पिता,भाई ,पति और पुत्र ) में अपनी सुरक्षा मानती हैं। सुरक्षा की ऐसी निर्भरता , के कारण कहीं-कहीं पुरुष द्वारा , नारी पर कई तरह का शोषण किये जाते हैं । कहीं-कहीं , दुष्टता में पुरुष नारी का दैहिक शोषण कर रहे हैं , कहीं उसे आत्महत्या -करने तक पर विवश कर रहे हैं , कहीं उसकी हत्या तक करते हैं । नारी को देह व्यापार से आजीविका को बाध्य करना भी किसी भी सभ्य मनुष्य समाज के लिये कलंक ही है।
"नारी -अपनी सामाजिक दशा से आहत है " , जो शोषण की सीधा शिकार है वह तो है ही , जो सुरक्षित है , घर -परिवार ,समाज और वर्कप्लेस में सम्मान पा रही है , वह भी , क्योंकि नारी पर शोषण के बनते नित नये समाचार , उसे अपनी सुरक्षा को सशंकित करते हैं। इसलिये भी कि नारी जीवन की कठिनाई वह अनुभव करती है , किसी नारी पर ऐसा अत्याचार , उनके जीवन को कितना अभिशापित कर देगा , इसकी कल्पना वह सरलता से कर सकती है । नारी , पुरुष की तुलना में ज्यादा दयालु भी है , करुणा उसके स्वभाव में है।
जब कोई आहत है तो उसका उपचार आवश्यक होता है। उपचार का उद्देश्य हमेशा सुधार का होता है। उपचार में सावधानी आवश्यक है , उपचार के प्रयास में ,घाव ज्यादा बिगाड़ देना या ज्यादा आहत कर देना , वाँछित नहीं है। इतनी भूमिका के बाद अब -
फोकस , किशोरी और अविवाहित युवतियों (Teen agers & Unmarried young women ) पर करूँगा । गर्लफ्रेंड , उन्हें ही कहा जा रहा है . जो नहीं हैं तो उन्हें गर्लफ्रेंड बनाने की कोशिशें जारी रहती हैं।
कौन हैं ये किशोरियाँ , या अविवाहित युवतियाँ ?
निश्चित ही किसी परिवार की पुत्री या बहन हैं।
परिवार इन्हें शिक्षा को और व्यवसाय को किस उद्देश्य से स्कूल /कॉलेज या जॉब में भेजता है?
वे किसी की गर्लफ्रेंड बनें ?
या इसलिये कि वे उन्नति करें , स्वयं सक्षम बने , जीवन में अपना सम्मान सुनिश्चित करने की योग्यता अर्जित करें। तथाकथित गर्लफ्रेंड होना , स्वयं किशोरियों और युवतियों (Teen agers & Unmarried young women ) की उन्नति में बाधक है . परिवार जिस लक्ष्य से उन्हें अवसर देता है , उसकी पूर्ती में बाधक है।
क्योंकि गर्लफ्रेंड बन जाना , शिक्षा से उसका ध्यान बाँटता है। समय ख़राब करता है। गर्लफ्रेंड होने पर असमय उन्हें दैहिक संबंधों में उलझना है। उसके बाद अधिकाँश ऐसे संबंधों का टूट जाना है। उसमें से अनेकों , में ब्लैक मेलिंग है। ब्लैक मेलिंग नहीं है तब भी , भविष्य में उनका भेद खुलना आशंकित होता है। जो वैवाहिक संबंधों के सुखदता पर खतरा है। अन्य का बॉयफ्रेंड रहा , अब पति होकर -अपनी पत्नी का पास्ट में किसी की गर्लफ्रेंड होना सहजता से स्वीकार नहीं करता।
नारियों और पुरुषों का तर्क हो सकता है , गर्लफ्रेंड का मतलब , दैहिक रिलेशनशिप में पड़ना है ही , नहीं। तब लेखक कहता है गर्लफ्रेंड ऐसी है तो यही उसका सम्पूर्ण चरित्र चित्रण है। वह जॉब में /शिक्षा में और साथ में दैहिक अपेक्षा के बिना , इन्वॉल्वमेंट के बिना पुरुष साथ उसी सहजता से लेती है जैसा की कोई गर्ल - अपनी सहेली से लेती है।
अगर सभी को गर्लफ्रेंड का यह चरित्र स्वीकार है तो इसे ऐसा परिभाषित करते हैं। "किसी बॉय का फ्रेंड जब कोई गर्ल होती है तो वह गर्ल होने से गर्लफ्रेंड कही जाती है। जहाँ लड़के -लड़के के बीच जैसा ही दैहिक संबंध प्रश्न से परे होता है । जिसमें गर्ल और बॉय के बीच सहज आकर्षण से कोई ऐसा दैहिक संबंध न बने इसका पूरा नियंत्रण रहता है। गर्ल जब इन मर्यादाओं में बॉय से फ्रेंडशिप रखती है तो वह गर्लफ्रेंड कहलाती है। "
अन्यथा वह स्वयं मूर्ख बन कर , अपने परिवार , माँ -पिता ,भाई और बहन के उस पर रखे विश्वास को छल लेती है। स्वयं को संकट में डाल , पूरे परिवार के मान और जीवन को भी संकट में डालती है। वह गर्लफ्रेंड नहीं होती है। छली गई एक मनुष्य होती है , जिनसे लेखक को वही सहानुभूति होती है जैसी उसे एक पिछड़े -अभावग्रस्त मनुष्य से होती है .
गर्लफ्रेंड की परिभाषा में एक विस्तार और जो आलेख को पूर्ण करता है।
"जब परिवार सहमति से अथवा वयस्क होने पर , किसी गर्ल/युवती का किसी पुरुष से उनके बीच मित्रता संभावित विवाह के लिये एक दूसरे को जानने /समझने के लिए होती है। जिसमें विवाह होने तक दैहिक इन्वॉल्वमेंट नहीं होता है। तब ऐसी गर्ल की ऐसी मित्रता को गर्लफ्रेंड होना कहा जा सकता है।
यह 'बात भी टूट जाने' की सम्भावना रहती है . इसलिए इसमें भी यौन संबंध निरापद (Safe) नहीं होते हैं।
बिना किसी शर्तों की गर्लफ्रेंड , "पत्नी" ही अपने पति की होती है।
जो युवतियाँ किसी की गर्लफ्रेंड हो इन सीमाओं को पार कर चुकीं हैं , वे शायद पढ़कर लेखक से असहमति रखेंगी । इस असहमति के कारण , उनका मन लेखक को खरी-खोटी ,सुनाने का हो सकता है। स्वागत है ,अपनी भड़ास ,अवश्य निकालें। किन्तु तब भी लेखक की सलाह यही होगी , कि वे तुरंत भूल सुधार करें ,आत्मनियंत्रित हों , सीमाओं के अंदर लौटें। सुबह का भूला शाम को घर लौटे , तो समाज शायद उसे भूला न कहे।
--राजेश जैन
05-01-2015
